महाराष्ट्र में रूफटॉप सोलर पर उपभोग-आधारित प्रतिबंध: AIREA ने MSEDCL को लिखा पत्र महाराष्ट्र में रूफटॉप सोलर (RTS) उद्योग इस समय गंभीर नीति-अनिश्चितता का सामना कर रहा है। 13 फरवरी 2026 से Maharashtra State Electricity Distribution Company Limited (MSEDCL) द्वारा लागू सौर क्षमता प्रतिबंध के खिलाफ All India Renewable Energy Association (AIREA) ने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है। यह प्रतिबंध पिछले 12 महीनों के बिजली उपभोग के आधार पर सौर प्रणाली क्षमता को सीमित करता है। AIREA का कहना है कि यह कदम राज्य नियामकीय प्रावधानों के विपरीत है और बिना किसी औपचारिक नीति दस्तावेज या सार्वजनिक घोषणा के सीधे पोर्टल पर लागू किया गया। 1️⃣ भविष्य की ऊर्जा योजना पर प्रभाव AIREA के अनुसार, सोलर सिस्टम लगने के बाद उपभोक्ता का बिजली उपयोग स्वाभाविक रूप से बढ़ता है क्योंकि: इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अपनाना ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एयर कंडीशनिंग / हीटिंग सिस्टम आधुनिक घरेलू उपकरण व्यवसाय या परिवार का विस्तार महाराष्ट्र में बिजली दरें ऊँची होने के कारण कई उपभोक्ता पहले बिजली बचत करते थे। सोलर लगने के बाद वे अपनी वास्तविक ऊर्जा आवश्यकताओं का उपयोग करने लगते हैं। नया घर – बड़ी समस्या यदि नया घर है और पिछले वर्ष केवल 100 यूनिट उपयोग हुआ हो, तो: केवल 1 किलोवाट सौर स्वीकृति जबकि वास्तविक आवश्यकता 3–5 किलोवाट हो सकती है 15–20% सौर बुकिंग नए घरों/अपार्टमेंट में होती है — वे सीधे प्रभावित होंगे। हाउसिंग सोसाइटी पर प्रभाव बहु-मीटर सोसाइटी में संयुक्त मांग अधिक होती है। उदाहरण: 80 किलोवाट आवश्यकता, लेकिन पोर्टल केवल 10 किलोवाट की अनुमति देता है। AIREA का मत है कि ऐतिहासिक उपभोग आधारित नीति भविष्य उन्मुख ऊर्जा योजना के विरुद्ध है। 2️⃣ MNRE ऑटो लोड एक्सटेंशन एवं नेट मीटरिंग से टकराव Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) द्वारा 10 किलोवाट तक ऑटो लोड एक्सटेंशन की सुविधा विशेषकर PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के तहत शुरू की गई थी। पहले इसे 5 किलोवाट किया गया और अब महाराष्ट्र में नई गाइडलाइन के कारण व्यवहारिक रूप से अवरुद्ध हो रहा है। नेट मीटरिंग का मूल सिद्धांत अतिरिक्त ऊर्जा ग्रिड में निर्यात वर्षांत में समायोजन न्यून फीड-इन टैरिफ AIREA का तर्क है कि उपभोग-आधारित प्रतिबंध नेट मीटरिंग के मूल उद्देश्य को कमजोर करता है। 3️⃣ सब्सिडी दुरुपयोग का आरोप – AIREA का उत्तर MSEDCL का दावा है कि उपभोक्ता अतिरिक्त सौर केवल सब्सिडी के लिए लगाते हैं। AIREA के अनुसार: पीएम सूर्यघर योजना में सब्सिडी 3 kW तक सीमित 1 kW अतिरिक्त की लागत ₹55, 000–60, 000 अतिरिक्त सब्सिडी मात्र ₹18, 000 कोई उपभोक्ता बिना आवश्यकता के आर्थिक घाटा क्यों उठाएगा? PM Surya Ghar पोर्टल उपभोक्ता को विक्रेता व क्षमता चयन का अधिकार देता है। MNRE सूचीबद्ध विक्रेता जवाबदेह होते हैं। 4️⃣ नियामकीय और कानूनी प्रश्न Maharashtra Electricity Regulatory Commission (MERC) विनियम 6.2 (2019, संशोधित 2023) के अनुसार: सौर क्षमता स्वीकृत लोड/कॉन्ट्रैक्ट डिमांड के 100% या 5 MW तक (जो भी कम हो) औसत उपभोग का कोई उल्लेख नहीं है। साथ ही, Electricity Act 2003 की धारा 7 और 9 उपभोक्ताओं को उत्पादन एवं कैप्टिव जनरेशन का अधिकार देती है। AIREA का मत है कि पोर्टल परिवर्तन राज्य आयोग के नियमन से ऊपर नहीं हो सकता। 5️⃣ उद्योग और रोजगार पर संभावित प्रभाव महाराष्ट्र में: व्यावसायिक दरें देश में सबसे ऊँची उच्च फिक्स्ड चार्ज मौसमी उपयोग उतार-चढ़ाव सौर ऊर्जा उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक बने रहने का प्रमुख माध्यम है। यदि प्रतिबंध जारी रहे: उद्योग अन्य राज्यों में स्थानांतरण GST और कर राजस्व में कमी रोजगार पर प्रभाव सौर उद्योग में निवेश घटेगा AIREA की प्रमुख मांगें AIREA ने MSEDCL से निम्नलिखित अनुरोध किए हैं: 1️⃣ उपभोग-आधारित प्रतिबंध तत्काल निलंबित करें विद्युत (उपभोक्ता सेवा) नियम 2024 धारा 7(क) के अनुसार 10 किलोवाट तक डीम्ड स्वीकृति बिना तकनीकी अध्ययन दी जाए। 2️⃣ संयुक्त समिति गठित करें स्पेशल प्रोजेक्ट विभाग व सौर उद्योग प्रतिनिधियों के साथ मासिक बैठकें। 3️⃣ दंड एवं डिस्कनेक्शन मामलों की समीक्षा उचित नोटिस और नियमानुसार कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। 4️⃣ साइट निरीक्षण केवल 10 kW से ऊपर छोटे उपभोक्ताओं को अनावश्यक विलंब से बचाया जाए। निष्कर्ष महाराष्ट्र भारत के अग्रणी सौर राज्यों में से एक है। नीति स्पष्टता और नियामकीय संतुलन आवश्यक है ताकि: उपभोक्ता अधिकार सुरक्षित रहें ग्रिड स्थिरता बनी रहे राष्ट्रीय सौर लक्ष्य प्रभावित न हों ऊर्जा संक्रमण में संवाद और पारदर्शिता ही स्थायी समाधान का मार्ग है। 🌞 Planning Rooftop Solar in Maharashtra? 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